भारत की स्वतंत्रता में मदन मोहन मालवीय जी का महत्वपूर्ण योगदान था
इनकी पांच भाई और दो बहनें थे और यह अपने माता-पिता की 5वी संतान थे
स्कूल में शिक्षक की नौकरी छोडकर इन्होने 1887 में संपादक का काम शुरू कर दिया था
हिन्दुस्तान टाइम्स को बंद होने से बचाने में इन्होने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी
1891 में इलाहबाद डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में एल.एलबी करने के बाद इन्होने अपनी प्रैक्टिस की थी
जीवन में 4 बार इन्हे इंडियन नेशनल कांग्रेस का प्रेसिडेंट चुना गया था
मालवीयजी ने हालांकि खिलाफत आंदोलन में कांग्रेस की भागीदारी का विरोध किया था
असहयोग आंदोलन में गांधी और अन्य लोगो के साथ इन्होने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी
जातिवादी विचारधारा की घोर विरोधी होने के कारण इन्हे ब्राह्मिण जाति से निष्कासित भी कर दिया गया था.
12 नवम्बर 1946 को उतर प्रदेश के वाराणसी मेंपंडित मदन मोहन मालवीय का देहावासन हो गया था